आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 110+ चाय पर शायरी 2 लाइन (Chay Par Shayari 2 Line) बताई है जो कि बहुत ही ज्यादा बेहतरीन और लाजवाब शायरी हैं। दोस्तों अगर आप भी चाय को पसंद करते हैं और आप एक चाय लवर है तो आज का यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होने वाला है। अगर आप भी चाय के लिए शायरी को पढ़ना चाहते हैं तो आप आपको चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है आप आज बिल्कुल सही जगह पर पहुंचे हैं।
अगर आप चाय पर शायरियों को पढ़ना चाहते हैं तो अब आपको चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 110 से भी ज्यादा चाय पर शायरी 2 लाइन (Chay Par Shayari 2 Line) बताई है। दोस्तों कुछ लोग चाय को बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं उनको किसी भी हाल में बस चाय चाहिए होती है तो अगर आप भी उन लोगों में से ही हैं तो आज का यह आर्टिकल आपके लिए ही है। आईये दोस्तों जानते हैं 110 से भी ज्यादा चाय पर कौन सी शायरी है।
Best 115+ Narazgi Shayari in Hindi
चाय की चुस्की और दोस्ती की मुलाकात,
यह होती है जिंदगी की सबसे अहम बात।
चाय के ठंडा सा प्यार जैसे दोस्ती को स्पर्श करता है,
जो सच्ची दोस्ती की तरह जीवन में उमंग भरता है।
दोस्ती और चाय की एक सुबह सा नजारा होता है,
जो दिल को भर देता है नई उमंगों से।
दोस्ती और चाय का रिश्ता होता है,
जो हर पल दिल को सुकून देता है।
चाय की प्याली और दोस्ती की मिठास,
दोनों साथ होते हैं जब तो जान होती है साथ।
दोस्ती की चुस्की जैसे चाय की मिठास होती है,
जो जीवन में सुख दुख के सफर में साथ रहती है।
यह किस्से चाहतों के साथ में चाय प्याली,
कोई सुना रहा था यह बातें प्यार वाली।
सुबह की चाय और खास बन जाए,
जब किसी दिन इसमें तुम्हारा साथ मिल जाए।
पीने बैठता हूं चाहे तो दिन पुराने याद आ जाते हैं,
दोस्तों के साथ बिताए वह जमाने याद आ जाते हैं।
कॉफी तो बड़े लोगों का शौक है,
हम और हमारे दोस्तों तो चाय के दीवाने हैं।
रिश्ते जाते जिम्मेदारी सब पर भारी,
दोस्तों के संग चाय हमारी।
मायूस चेहरे उस वक्त खिलेंगे,
जब सारे दोस्त चाय पर मिलेंगे।
कुछ नहीं बचा कहने को हर बात हो गई,
आओ कहीं चाय पिए रात हो गई।
दोस्त तेरी दोस्ती मेरे जिंदगी में उतनी ही मायने रखती,
जितनी चाय को अपनी सांवली रंग मायने रखती।
इश्क के हारे लोग या तो मैखाने में,
मिलते हैं या चाय के ठिकानों में।
मिलते रहना सबसे किसी न किसी बहाने से,
रिश्ते मजबूत होते हैं चाय पीने पिलाने से।
बिना बदनामी का नशा किया करते हैं,
हम मासूम लोग हैं जनाब बस चाय पिया करते हैं।
खत्म होने दो बंदिशें सभी,
सब मिलेंगे दोस्तों चाय पर कभी।
आदत नहीं कुछ लाइलाज बीमारी है,
चाय से मेरी कुछ इस कदर यारी है।
चलो इस बेफिक्र दुनिया को खुलकर जी लेते हैं हम,
काम छोड़ो पहले चाय पी लेते हैं हम।
कभी हमको भी दोस्त बनाया करो,
कभी हमारे साथ भी चाय पर आया करो।
गम-ए-इश्क को कुछ इस कदर भुला आया,
मैं पुराने दोस्तों के साथ अदरक वाली गर्म चाय पी आया।
सुबह खड़ी है चौखट पर रात को ठीक से रवाना कर दो,
चाय भी तैयार है तुम बस आने का बहाना कर दो।
चाय की महक से मोहब्बत हुई है,
चाय के प्याली से यह शायरी बहुत हुई है।
चाय के ठंडा सा प्यार जैसे दिल को स्पर्श करता है,
जो इश्क के गर्म हवा की तरह जीवन में उमंग भरता है।
इश्क और चाय की एक झलक सा नजारा होता है,
जो देता है लंबे समय तक खुशियों का सहारा।
इश्क और चाय की झलक सा रिश्ता होता है,
जो न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि मीठा भी होता है।
इश्क और चाय दोनों ही एक जैसे हैं जो मन को भरमाते हैं,
जब दोनों के साथ बैठे हम तो जिंदगी लगती है स्वर्ग के आसपास।
चाय की महक से लेकर इश्क की चुनौती तक सब मेरे दिल के करीब हैं,
जो हमेशा साथ हैं जैसे चाय का इश्क हमारे दिलों में घुला रहता है।
तुमसे मिलने की तमन्ना में चाय के प्याले से प्यार कर बैठे हम,
जो अब दिन रात तुम्हारे साथ चाय की चुस्कियों का मजा लेते हैं।
Best 101+ Propose Shayari in English
जब से तुम्हें देखा है दिल में चाय का इसको भर आया है,
जो अब दिन रात तुम्हारी यादों से भरा रहता है।
चाय की ताजगी और मीठापन से हमेशा मनोरंजन मिलता है,
जो देती है सारे दिन का एक अलग सा जाएका और सुकून मन को।
चाय की चुस्की न सिर्फ स्वादिष्ट होती है,
बल्कि उसमें छुपा एक मीठा सा एहसास भी होता है।
जो दिन की शुरुआत चाय के साथ होती है,
उस दिन सारा दिन अच्छा गुजरता है।
जिंदगी की हर मुश्किल से पल भी निपटने का तरीका है चाय का साथ,
जिससे दिल को मिलता है एक अलग सा राहत का एहसास।
चाय फीकी पड़ जाती है,
तुम्हारी मीठी बातों के सामने।
चंद लम्हों को सर्दियों में जीना है,
मुझे तुम्हारे होठों से लगी चाय पीना है।
यह दिल बड़ा ही ना समझ है,
इसे चाय से बड़ा ही इश्क है।
जैसे कोई चाँद ढूंढ लेता है मोहब्बत के फसाने में,
वैसे मोहब्बत मिल जाती है मुझे चाय के प्याले में।
उसका होना इस तरह महसूस कर लेता हूं,
तस्वीर सामने रखकर चाय दो कप पी लेता हूं।
कॉफी से ज्यादा चाय पसंद करता हूं,
पगली मैं तेरी दोस्त को नहीं तुझे पसंद करता हूं।
चाय का कप हाथों में लेकर तुम्हें सोचना,
मेरे बेहतरीन लम्हों में से एक लम्हा है।
तुझसे अब मेरा रिश्ता ऐसा है,
चाय में कूटे अदरक जैसा है।
थक गया हूं सबकी राय से,
मुझे मोहब्बत है सिर्फ चाय से।
अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी है,
चाय बस चाय नहीं मोहब्बत बन चुकी है।
नशा इश्क का है बुरा ग़ालिब,
महबूब के हाथों का जहर भी चाय लगता है।
कुछ इस तरह मेरी जिंदगी में तेरा राज हो,
जैसे चाय के चुस्की में अदरक का स्वाद हो।
उनके लबों में भी क्या खूब नशा है,
लगता है कि उनके झूठे पानी से ही चाय बनती है।
एक तो वह है इतनी हसीन,
ऊपर से चाय के शौकीन।
चाय और इश्क के जितने करीब आओ,
तलब उतनी ही बढ़ जाती है।
कॉफी बहुत पसंद थी उसे पर चाय पीने लगी थी,
मेरे इश्क के लिए वह कुछ इस तरह जीने लगी थी।
मैंने देखा ही नहीं कोई मौसम,
मैंने चाहा है तुम्हें चाय की तरह।
दर्द क्या होता है उससे पूछो,
उसका बिस्कुट चाय में गिर गया हो।
यूं तो बहुत सख्त है मेरा दिल,
पर कमवख्त चाय पर पिघल जाता है।
तेरे लबों पर लगी चाय पीना चाहता हूं,
दो पल की जिंदगी तेरे साथ जीना चाहता हूं।
सांवला है रंग थोड़ा कड़क मिजाज है,
सुनो तुम पसंद हो हमें तुम्हारा चाय सा स्वाद है।
जिस पल में तेरा एहसास ना हो,
वह चाय फिर चाय कैसी जिसमें तेरे होठों की मिठास ना हो।
तीन ही शौक थे मेरे,
एक चाय एक शायरी और तुम।
चलो एक ख्वाब देखते हैं तुम और मैं एक साथ देखते हैं,
घर की छत पर चाय के कप के साथ हर एक शाम देखते हैं।
तेरे बिना जिंदगी है ऐसे,
चीनी बिना चाय हो जैसे।
उन्होंने कहा कि इतनी गर्मी में चाय,
मैंने कहा अब मोहब्बत भी मौसम देखकर करनी पड़ेगी क्या।
एक अच्छा आराम से पीजिए जनाब,
सुना है इश्क की चाय बड़ी गर्म होती है।
उसका सांवला रंग चाय सा,
बस देखकर तलब हो जाती है।
इश्क और चाय एक जैसी ही है जनाब,
जितना वक्त दोगे उतनी ही बेहतर बनेगी।
चाय से होंठ जलते हैं दिल को सुकून मिलता है,
और इश्क से दिल जलता है होठों को सुकून मिलता है।
इश्क हुआ था मुझे उससे,
उसके हाथों में चाय देखकर।
उसने भी इश्क निभाया मेरी मोहब्बत में,
उसने खुद को चाय पीना सिखाया मेरी मोहब्बत में।
बाकी पूरी दुनिया से अनजाने हैं हम,
हम एक चाय और तेरे इश्क के दीवाने हैं हम।
हां मुझे इश्क है,
उसके हाथों से बनी चाय से।
चाय नहीं तुझसे इश्क़ करवाया या तूने चाय से,
तलब तुम्हारी लगी या चाय की यह कैसा इश्क हमने फरमाया।
पहले मुझे ना तुम पसंद थे ना चाय,
आज दोनों की आदत बन गई।
बाबूजी के हाथों में अखबार पकड़ते ही,
मां का चाय बनाने लग जाना है ही इश्क है।
तीखे तेवर में मीठी चाय लाई थी,
इश्क था उसमें ऐसी शरमाई थी।
कहते हैं इश्क में नशा है,
और मुझे चाय से इश्क है।
जब साथ होती है मैं दोनों को,
अपने होठों से लगा देता हूं।
किसी ने हमसे पूछा आपको बहुत ज्यादा पसंद है या चाय,
मैंने कहा उसके साथ चाय।
हर रोज मिलते थे उस चाय की टपरी पर,
आज सोच रहा हूं इश्क उनसे था कि चाय से।
बिना श्रृंगार भोली सी सूरत हर बात पर सच्ची लगती हो,
हा तुम हो बिल्कुल मेरी चाय की जैसी मुझे सांवली ही अच्छी लगती हो।
यह इश्क का ऐसा सुरूर जो सुबह,
चाय के साथ उसकी याद दिलाता है।
एक चाय ही है साहब,
जिसे हर मजहब से प्यार है।
मेरा इश्क उससे इस तरह मिल गया,
जैसे चाय में चरस घुल गया।
कॉफी वाले तो सिर्फ फ़्लर्ट करते हैं,
कभी इश्क करना हो तो चाय वालों से मिलना।
वह पल भी कोई पल है जिस पल में तेरा एहसास न हो,
हां वह चाय फिर चाय कैसी जिसमें तेरी होठों सी मिठास न हो।
इश्क है तो जाहिर कर बना कर चाय हाजिर कर,
अदरक डाल या डाल इलायची कूटकर मोहब्बत भी शामिल कर।
महफिल में जो मिले इंकार तो नहीं मगर,
तनहाई में अक्सर मैंने चाय से वफा मांगा है।
एक मुलाकात थी हमसे और अपने इश्क के इजहार को,
चाय के दीवाने निकले हम दोनों क्या कहें इस इस्तेफाक को।
खबर तबी फैली मोहल्ले में तेरे मेरे इश्क की,
जब मेरे चाय के कप पर तेरे होठों के निशान मिले।
साथ में चाय पीकर चाहत को बढ़ाया करो,
रिश्तो से दूरी बनाकर दिल के दरार नहीं भरते हैं।
हाथ में चाय और यादों में आप हो,
फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो।
एक सुबह की चाय तुम्हारी और एक चाय हमारी भी,
कुछ बातें दिल में तुम्हारे भी और कुछ जज्बात हमारे भी।
ज्यादा बड़ा शायर नहीं हूं मैं,
बस चाय को मोहब्बत लिख दिया करता हूं।
अच्छी पी ली खराब पी ली,
जैसी भी मिली चाय मुझे मैंने वो सब पी ली।
रोक देंगे हम मोहब्बत को तलाश करना,
बस कोई हमसे चाय का शौकीन मिल जाए।
मैं मिट्टी के कुल्हड़ सातेरी खुशबू से मगरूर हूँ,
तू कड़क चाय की पत्ती है मैं उबला हुआ दूध हूँ।
कुछ इस तरह से मेरी जिंदगी में उसका राज है,
जैसे चाय की चुस्की में अदरक का स्वाद है।
तस्वीरों के साथ इश्क का वहम पाल रखा है,
वो तेरा चाय का झुटा कप आज भी संभाल रखा है।
मैनें खुबसूरत लोगो को सांवली चाय पे मरते देखा है,
शायद इसलिए इश्क नाम रख दिया है लोगों ने चाय का।
जरुरत से ज्यादा बेमिसाल हो तुम,
थोड़ी सांवली हो पर चीज कमाल हो तुम।
काश मैं इस तरह की चाय बना पाता,
नफरतों को दिल से हमेशा के लिए मिटा पाता।
जैसे जैसे इन सर्दियों में कोहरा हुआ,
चाय के साथ मेरा इश्क और गहरा हुआ।
जैसे जैसे शाम ढलती जा रही है,
तुम्हारे संग चाय की तलब बढती जा रही है।
चाय के नशे अल आलम तो कुछ यह है ग़ालिब,
को राय भी दे तो अदरक वाली बोल देते हैं।
जब ये चाय और तेरे लबों को छू लेते हैं,
तो हम एक पल में सदियाँ जी लेते हैं।
लोगों ने दारु को तो यूँ ही बदनाम किया है,
असली नशा तो चाय पीने में है।
लोगों की दोस्ती पर शक होने लगा है,
क्योंकि चाय पीने वाला आज कल कौफी पीना लगा है।
जितना उबलती है उतनी ही बेहतर लगती है,
यह चाय भी ना मुझे मेरे गुस्से वाली बाबू जैसी लगती है।
महंगाई ने आशिकों को मार रखा है,
यह चाय ही है जिसने अभी तक संभाला हुआ है।
वह पल भी कोई पल है जिस पल तेरा एहसास ना हो,
वह चाय फिर चाय कैसी जिसमें तेरी होठों सी मिठास ना हो।
मैं सुकून लिखूं तुम गंगाघाट समझ लेना,
मैं इश्क लिखू तुम चाय समझ लेना।
Top 50+ Khwaja Garib Nawaz Shayari
निष्कर्ष
आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 110+ चाय पर शायरी 2 लाइन (Chay Par Shayari 2 Line) बताई हैं जो कि आप के लिए बहुत ही फायदेमंद होंगी। आशा करते हैं कि आपको हमारा आज यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको हमारा आज का ये आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों में भी शेयर करे ताकि अगर वह भी चाय के शौकीन हैं तो चाय पर शायरी को पढ़ सकें।




