75+ गांव की सुंदरता पर शायरी | Village Love Shayari in Hindi (2024)
दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 75+ गांव की सुंदरता पर शायरी (Gaon Ki Sundarta Par Shayari) बताई है। दोस्तों जैसा कि हम जानते ही हैं कि शहर की अपेक्षा अगर हम गांव में देखें तो बहुत ही कम प्रदूषण होता है और गांव में बीमारी भी बहुत कम होती है। क्योंकि जिस जगह प्रदूषण कम होता है वहां बीमारी भी कम होती है शहर में बड़ी-बड़ी गाड़ियां चलती है जिसके कारण शहर में बहुत सारा प्रदूषण फैलता है लेकिन गांव में ऐसा कुछ भी नहीं होता है और गांव देखने में भी हमें बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगता है।
गांव में हर जगह हरियाली ही हरियाली होती है जो की काफी ज्यादा खूबसूरत लगती है इसलिए कुछ लोग अपने गांव की तारीफ को बयां करते हुए गांव की सुंदरता पर शायरी (Gaon Ki Sundarta Par Shayari) लिखना चाहते हैं या फिर कहीं कोई प्रोग्राम हो तो अपने गांव की तारीफ में कुछ शायरी बोलना चाहते हैं। लेकिन उनके पास गांव की सुंदरता को लेकर शायरी नहीं होती है इसलिए वह नहीं बोल पाते हैं तो अब आपको चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 75 से भी ज्यादा गांव की सुंदरता के लिए शायरी बताई है।
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शहरों में तो बारूदों का मौसम है,
गांव चलो यह अमरूदों का मौसम है।
मुसीबतें चाहे लाख आ जाए पर यह लड़का कभी नहीं रोता,
और धोखेबाज बोलने वालों गांव से हूं धोखे का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।
शहर से अच्छा अपना गांव है साहब,
जहां लोग मकान नंबर से नहीं पिता के नाम से पहचानते हैं।
तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है,
और तू मेरे गांव को गवार कहता है।
ए शहर मुझे तेरी औकात पता है,
तू चुल्लू भर पानी को वाटर पार्क कहता है।
थक गया है हर शख्स काम करते-करते,
और तू शहर को अमीरी का बाजार कहता है।
वह सुकून वह खुशियां इस दुनियादारी में कहां,
जो खुशियां ममता की छांव में मिलेगी।
और तुम किन की बातों में आ गए दोस्त,
मेरी असलियत की तस्वीर मेरे गांव में मिलेगी।
कभी आना मेरे गांव में मैं तुम्हें गांव का नजारा दिखाऊंगा,
और मेरे पास कोई केटीएम या बुलेट बाइक तो नहीं है,
लेकिन मैं अपनी साइकिल पर बैठा कर तुम्हें पूरा गांव घुमाऊंगा।
हम गांव वाले तुम शहर वाले चलो फिर से एक मुलाकात देख लेते हैं,
तुम औकात देखकर बात करते हो हम बात करके औकात देख लेते हैं।
पीठ पीछे भौंकने की आदत नहीं वार करते हैं सीधा छाती पर,
और शूरवीर जन्म लेते हैं इस गांव की मिट्टी पर।
हम गांव के लोग हैं जाना जलने वालों को जलाते आए हैं और आगे भी जलाते रहेंगे,
वह पीठ पीछे भौंकेंगे और हम सामने से बजाते रहेंगे।
मौज कर दी है राम ने उनकी,
जिनको जन्म दे रखा है गांव में।
पुरखों का मकान बेचकर शहर ना जाया करो,
न जाने कब शहर छोड़ना पड़ जाए गांव में ही रह लिया करो।
मिठास के फल प्यार के फूल खुशियों के पेड़ की छांव से हूं,
जी हुजूर सही पहचाना मैं गांव से हूं।
जहां ताजी हवा ठंडा पानी बेहतरीन पेड़ों की छांव है,
हां तुम्हारे शहर से अच्छा मेरा छोटा सा गांव है।
खींच लाता है गांव में बड़े बुढो का आशीर्वाद,
लस्सी गुड़ के साथ बाजरे की रोटी का स्वाद।
शहर की हलचल से दूर यहां आराम और सुकून है,
घर तो अपना गांव में ही है जब शहर में तो सिर्फ मकान है।
हम भी गांव में शाम को बैठा करते थे,
हमको भी हालत नहीं बाहर भेज दिया।
मैं गांव वाला हूं तुझे प्यार बहुत करूंगा,
जितना शहर वाला तुझ पर खर्च करेगा उससे ज्यादा की तुझे चाय पिलाऊंगा।
और मुझे बेवफाई की बात ना करना कभी,
वरना गांव वाला हूं तुझे अपना किरदार भी दिखाऊंगा।
नकली चेहरे गांव में भी है मगर उनकी आंखें सच्ची है,
शहर के भीतरी शोर से अच्छा आटा चक्की की पुक-पुक-पुक-पुक अच्छी है।
गांव में देखो मुस्कुराती है फुल गोभियां,
शहर ने पहले बाल रंगे फिर हरी सब्जियां।
देखा है मैंने थोड़ा सा शहर घुस रहा है गांव में,
कोई कर रहा है चुपके से छेद नाव में।
ए सी की कमी गिना रहा है पीपल की छांव में,
पहिया पलायन का बांध लिया है पांव में।
मेरी दुआ है खूब तरक्की करे यह जमाना,
मगर गांव की लाश पर शहर मत उगाना।
शहर बसा के गांव ढूंढते हैं,
अजीब पागल है हाथ में कुल्हाड़ी लेकर छांव ढूंढते हैं।
बड़े से समुद्र में छोटी सी नाव भेजेंगे,
हम भी अपने बच्चों को छांव भेजेंगे।
करेंगे मेहनत कमाएंगे पैसा,
जितना रुपया होगा सर अपने गांव भेजेंगे।
एक वक्त था जब टेंशन नहीं थी किसी बात की,
दोस्त मोबाइल और गर्लफ्रेंड बस यही मेरी लाइफ थी।
सुबह देर से उठाना दे रहा है तब जागना,
पैसे नहीं है तो मम्मी से पैसे मांगना।
गांव में बहुत बिगड़े हैं अब सुधर जाने को जी चाहता है,
बचपन में जहां-जहां खेले थे अब तो बस उधर जाने को जी चाहता है।
और बहुत घूम लिए इन शहरों में मुसाफिर बनकर,
मां की याद आ रही है अब बस घर जाने को जी चाहता है।
कुछ मजबूरियां होती हैं मेरे दोस्त,
वरना कौन अपना गांव छोड़ना चाहता है।
खुशी के माहौल में मौत का फरमान आ रहा है,
और जो लोग कहते थे गांव में क्या रखा है आज उन्हें भी गांव याद आ रहा है।
ना पेड़ है ना छांव है,
तुम्हारे शहर से अच्छा तो मेरा गांव है।
गांव की पुरानी यादों को दिल से सजाया करो,
शहर में चाहे कितनी भी तरक्की कर लो पर गांव में अपनों से मिलने जाया करो।
तुम्हारे शहर में तो मय्यत को लोग कंधा नहीं देते,
हमारे गांव में छप्पर भी सब मिलकर उठाते हैं।
बचपन में गांव से शहर आने में खुशी मिलती थी,
बड़े हुए तो शहर से गांव आने में खुशी मिलती है।
गांव में मेरा सब कुछ था,
एक नौकरी के लिए शहर में किराएदार बन बैठे हैं।
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कार बनाने वाले चलकर पांव से आए थे,
यह शहर बसाने वाले भी चल के गांव से आए थे।
शहर घूमता है काले चश्में लगा के गांव अभी भी नजर मिला लेता है,
शहर बीमार होता है दावाओं से गांव बीमारी में भी खुद को जला लेता है।
शहर के घर से लोग खाली हाथ लौट जाते हैं,
गांव में लोग बर्तन भी खाली नहीं लौटाते हैं।
होगी तेरे पास लाख सुविधाएं,
पर गांव वाला सुकून कहां से लाएगा।
चेहरे से मासूम और बातों से सच्ची लगती है,
मन में कोई चालक ही नहीं रखती गांव की लड़की मुझे इसलिए भी अच्छी लगती है।
आवारा घूमने का शौक है जनाब हम मोहताज नहीं किसी छांव के,
यह गुलामी का शहर तुम्हें मुबारक हम राजा हैं अपने गांव के।
धरती के सीने में जख्म हर किसान करता है,
और कमा कर भी अन्यदाता अपने हक के लिए लड़ता है।
प्रकृति की हर मार को सहकर भी,
किसान इतनी ठंड में भी सड़कों पर मरता है।
भूक से मर जाते हैं जमीन नहीं बेचते,
हम गांव के लोग हैं यकीन नहीं बेचते।
पेड़ काटने आए हैं कुछ लोग मेरे गांव में,
अभी धूप बहुत तेज है कह कर बैठे हैं छांव में।
उस शख्स की मंजिल थी कोई काफ के आगे,
मैं राह में पढ़ते किसी गांव की तरह थी।
वह तेरा शहर तेरे लोग रवायात तेरी,
तुम अगर गांव में होते तो हमारे होते।
जब मैं उसके गांव से बाहर निकला था,
हर रास्ते ने मेरा रास्ता रोका था।
शहरों की मोहब्बत तो नागिन की तरह है,
मैं अगली मोहब्बत किसी गांव में करूंगा।
मेरे गांव में मुझे देखने आया होगा,
सैर करने को तो कागान भी जा सकता था।
बता ए अरे मसाबात क्यों नहीं करता,
हमारे गांव में बरसात क्यों नहीं करता।
हम गांव वाले हैं इजहार कर नहीं सकते,
हम जैसे लोग हसीन लड़कियों से डरते हैं।
फिर मुझे खुद की खबर ना हो सकी मैं हूं कहां,
आखरी बार तेरे गांव में देखा क्या हूं।
दूर तक साथ दिया करती हैं आंखें उनकी,
तूने देखे हैं कभी गांव से जाते हुए लोग।
तुम्हारे हिजर ने हालत बिगाड़ दी मेरी,
मैं अपने गांव का सबसे हसीन लड़का था।
हम गांव के सादा लोग,
मोहब्बत हो भी जाए तो इज़हार नहीं करते।
शहर की इस भीड़ में चल तो रहा हूं,
जहन पर गांव का नक्शा रखा है।
तुम्हारे शहर की मिट्टी लगी थी पैरों को,
हमारे गांव के रास्ते खुशी से पागल है।
चल इंसान अपने गांव में,
बैठेंगे सुख की छांव में।
यहां उलझे उलझे रूप बहुत पर असली काम बहरूप बहुत,
उस पेड़ के नीचे क्या रुकना जहां साया कम हो धूप बहुत।
क्यों तेरी आंख सवाली है यहां हर एक बात निराली है,
इस देश बसेरा मत करना यहां मुफलिस होना एक गाली है।
जहां सच्चे रिश्ते नारियों के जहां घूंघट जेवर नारियों के,
जहां झरने कोमल सुख वाले जहां साज बजे बिन तारों के।
थोड़ी सी धूप के साथ थोड़ी सी छांव चलो ना,
चलो अब थोड़ा शहर से दूर गांव चलो ना।
मकान वहां भी है यहां भी है पर घर नहीं,
जहां आंगन वाला घर है उस गांव चलो ना।
शहर की हाय हेलो से गांव का राम-राम ठीक है।
2 गज पक्के कमरों से गांव का कच्चा मकान ठीक है।
खूब रंग बिरंगी दीवार है तेरे शहर में,
पर मेरे गांव की सूनी गालियां भी तनहाइयां मिटा देती हैं।
कभी पूछो अहमियत मेरे गांव की उनसे,
चार पैसे कमाने के लिए जो इसे छोड़कर गए हैं।
गली-गली में थे यार दोस्त उनके,
न जाने कितने दिलों को तोड़ कर गए हैं।
हसीन वादियों में जब चलती है हवा मतवाली,
लहरा के झूमर ते हैं खेत के सरसों और गेहूं की बाली।
अपनी जवानी से बड़प्पन को लौटा देने की फरियाद करता हूं,
मेरे गांव की मिट्टी में तुझे रोज याद करता हूं।
वह पेड़ मेरी राह आज भी देख रहा है,
जिसकी छांव में मेरा बचपन गुजरा है।
सूनी हो गई है मेरे गांव की गालियां अब तो,
ख्वाहिशें ने सबको शहर भेज दिया है।
बदला बदला सा मौसम लगता है बदले से लगते हैं सुर,
दीदा फाड़े शहर देखता गांव देखा टुकुर-टुकुर।
घरों को होता सुनसान देखकर,
खुद को ताना और वीरान देखकर।
क्यों जा रहे हैं सब छोड़कर मुझे,
बहुत रोया है गांव यह सोच सोच कर।
वह मिट्टी का मकान अब महल बन गया है,
गांव गांव से अब शायर बन गया है।
बहने लगी है शहरी अबोह्बा गांव में,
ए गांव तू गांव ही रहता तो अच्छा होता।
वह आमों की बगिया वह पोखर का पानी वह बरगद था साया मेरा,
उठ-उठ के रातों को रोता हूं मैं जब-जब गांव याद आया मेरा।
बहुत वीरानियों में रह रही हैं गांव की गलियां,
उसने हवाओं से खबर भिजवाया है मुझको।
खेतों की हरियाली छूटी वह बाग बगीचे छूटे हैं,
बचपन की उन गलियों से सब रिश्ते नाते टूटे हैं।
बड़े गुरुरों से शहर गांव को चिढ़ाने गया था,
बहुत शर्मिंदा हुआ शहर गांव ने खैरियत जब पूछा।
निष्कर्ष
आज के इस आर्टिकल में हमने आपको 75+ गांव की सुंदरता पर शायरी (Gaon Ki Sundarta Par Shayri) बताई है जो ki गांव की सुंदरता को व्यक्त करती हैं और बताती हैं कि आज भी गांव में शहर के मुकाबले कितना सुकून है और शहर के मुकाबले आज भी गांव कितना खूबसूरत है। भले ही बड़े-बड़े शहर में बड़ी-बड़ी घूमने की जगह है और बड़ी-बड़ी इमारतें बन गई है लेकिन एक बात हमें ध्यान रखनी चाहिए वह बड़े-बड़े शहर भी छोटे-छोटे गांव से मिलकर ही बने हैं।